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सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

कुंवारी लड़कियों को शिवलिंग की पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए-Why should not virgin girls worshiped Shivling

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हमारा हिन्दू धर्म बहुत ही बड़ा और विस्तृत धर्म है ,इस विशाल धर्म से निकली अनेक शाकाए आज एक धर्म का रूप ले चुकी है ,इस महान धर्म में अनेक धारणा और नियम है जो ऋषि मुनियों के दुवरा बनाये गये है और बिलकुल सही है , ये नियम विज्ञानं सम्मत है ,क्यों की इन को मुनियों ने योग शक्ति से बनाया था ,फिर भी कुछ नियम इसे होते है ,जिनको देखकर लगता है की इस नियम के पीछे कोई तर्क नही है ,जेसे , कुंवारी लडकिया भगवान शिव के शिवलिग की पूजा नही कर सकती ,इस के पीछे भी कारण है ,जानिए ये कारण और इसके पीछे का सच -
कुंवारी लड़कियों को शिवलिंग की पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए-Why should not virgin girls worshiped Shivling

कुंवारी कन्याओं के लिए वर्जित है पूजा

ऐसी मान्यता है कि लिंगम एक साथ योनि (जो देवी शक्ति का प्रतीक है एवं महिला की रचनात्मक ऊर्जा है) का प्रतिनिधित्व करता है। हालांकि शास्त्रों में ऐसा कुछ नहीं लिखा है। शिवपुराण के अनुसार यह एक ज्योति‍ का प्रतीक है।
क्या है सामाजिक धारणा?

कुछ सामाजिक धारणाओं के अनुसार शिवलिंग की पूजा सिर्फ पुरुष के द्वारा संपन्न होनी चाहिए न कि नारी के द्वारा। महिलाओं को शिवलिंग की पूजा से दूर ही रखा जाता है, खासतौर पर अविवाहित स्त्री को शिवलिंग पूजा से पूरी तरह से वर्जित रखा जाता है। परन्तु ऐसी मान्यताएं क्यों बनाई गई हैं?

शिवलिंग के करीब जाने से मनाही

किंवदंतियों के अनुसार अविवाहित स्त्री को शिवलिंग के करीब जाने की आज्ञा नहीं है। आमतौर पर शिवलिंग की पूजा करने के बाद श्रद्धालु इसके आसपास घूमकर परिक्रमा करने को सही मानते हैं, लेकिन अविवाहित स्त्री को इसके चारों ओर घूमने की भी इजाज़त नहीं दी जाती। ऐसा इसलिए क्योंकि भगवान शिव बेहद गंभीर तपस्या में लीन रहते हैं।
शिव की तपस्या से है संबंध

और किसी स्त्री के कारण उनकी तपस्या भंग ना हो जाए, इसका ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हमेशा से ही जब भी भगवान शिव की पूजा की जाती है तो विधि-विधान का बहुत खयाल रखा जाता है। केवल मनुष्य जाति ही नहीं, देवता व अप्सराएं भी भगवान शिव की पूजा करते समय बेहद सावधानी से उनकी पूजा करती हैं।
क्रोधित हो जाते हैं शिव जी

यह इसलिए कि कहीं देवों के देव महादेव की समाधि भंग न हो जाए। जब शिव की समाधि भंग होती है तो वे क्रोधित हो जाते हैं और अपने रौद्र रूप में प्रकट होते हैं जिसे शांत कर सकना किसी असंभव कार्य के समान है। इसी कारण से महिलाओं को शिव पूजा न करने के लिए कहा गया है।

लेकिन शिव की पूजा कर सकते हैं

लेकिन शिवलिंग की पूजा से अविवाहित स्त्रियों को दूर रखने का यह अर्थ नहीं है कि वे भगवान शिव की पूजा नहीं कर सकतीं। बल्कि कुंवारी कन्याएं ही शिव जी की सबसे अधिक आराधना करती हैं। अपने लिए एक अच्छे वर की कामना करते हुए वे पूर्ण विधि-विधान से शिव जी के 16 सोमवार का व्रत रखती हैं।
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