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बुधवार, 19 अक्तूबर 2016

कहानी दुनिया की सबसे बड़ी चीन की दीवार की -The story of the world's largest Chinese wall -

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चीन की 7000 हजार वर्ष पुरानी सभ्यता विश्व की चार सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है।यहां के ऐतिहासिक स्थलों में चीन की महान दीवार (ग्रेट वाल) सबसे प्रसिद्ध है। इसकी लंबाई लगभग 6350 किमी है, जो पूरे उत्तरी चीन में फैली हुई है। 7वीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर 16वीं शताब्दी तक लगभग 2000 वर्षो से अधिक समय में चीन के सभी राजवंशीय सम्राटों ने इस महान दीवार के अनेक टुकडे़ बनाए, यदि उन सभी को जोड़ दिया जाता, तो यह दीवार पचास हजार किलोमीटर लंबी होती।
कहानी दुनिया की सबसे बड़ी चीन की दीवार की -The story of the world's largest Chinese wall -
चीन की यात्रा के दौरान, जो यात्री इस महान दीवार पर नहीं चढ़ा, उसकी यात्रा अधूरी मानी जाती है। अंतरिक्ष से पृथ्वी की तरफ देखने पर जल के अलावा सिर्फ चीन की विशाल दीवार ही साफ दिखाई देती है। चीन की यह लंबी दीवार जितनी बड़ी है, उतनी ही पुरानी इसकी कहानी भी है। इस दीवार का मूल नाम है 'वान ली छांग छंग' जिसका शाब्दिक अर्थ है-चीन की महान दीवार । विश्व प्रसिद्ध इस चीनी दीवार का इतिहास ईसा से तकरीबन 300 वर्ष पूर्व शुरू होता है। उन दिनों उत्तरी क्षेत्र के खानाबदोश हूण कबीले चीन पर लगातार आक्रमण करते रहते थे।


तत्कालीन सम्राट चीन शिहाड़ती ने उनसे देश की रक्षा के लिए उत्तरी भू-भाग पर विशाल दीवार बनाने का आदेश दिया। छह हजार किलोमीटर लंबी दीवार का निर्माण अनवरत डेढ़ हजार वर्षोतक चलता रहा। दीवार में कई जगह पर बुर्ज बनाए गए हैं। इस दीवार की चौड़ाई इतनी है कि इस पर पांच घोड़े एक साथ दौड़ सकते हैं। दीवार पर अनेक स्थानों पर संस्कृत भाषा में मंत्र खुदे हैं। पीकिंग से 80 किमी दूर चु-चुंग क्वान नामक स्थान पर दीवार के प्रवेश द्वार पर लोकपालों की जो चार मूर्तियां बनाई गई हैं उनमें भारतीय मूर्तिकला की झलक मिलती है। समझा जाता है कि इस दीवार के निर्माण में कुछ भारतीय मूर्तिकारों को भी शामिल किया गया था। इस दीवार का निर्माण विदेशी हमले से बचाव के लिए किया गया था लेकिन इसका इस्तेमाल सदियों तक परिवहन, माल व लंबी यात्राओं में होता रहा। हालांकि यह दीवार पूरी तरह सुरक्षित और अजेय नहीं रही। अनेक आक्रमणकारियों ने इसको ध्वस्त किया। सन् 1211 ने चंगेज खां ने इस दीवार को तोड़कर चीन पर हमला किया। हाल ही में मंगोलिया ने इस दीवार को लगभग तीस किलोमीटर तक क्षतिग्रस्त किया। वैसे 1984 से एक गैर सरकारी फाउंडेशन इस दीवार के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग अर्जित कर रही है।
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