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शनिवार, 15 अक्तूबर 2016

लड़की ये बाते सोचती है रात को अकेले में -Girl thinks these things alone at night -

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लड़कियों का जब मासिकधर्म शुरू होता है तो उसके बाद उनके शरीर में खास तरह के हार्मोन्स का विकास होना शुरू होता है और इसी समय से लड़कियां काम भावना की ओर भागने लगती हैं। इसी समय लड़कियों के शारीरिक अंगों का भी विकास होने लगता है जैसे उसके स्तन और नितंबों का भारी होना, जननांगों पर बाल उगना़, आवाज का बदल जाना आदि। माना जाता है कि जिन लड़कियों का मासिकधर्म जल्दी शुरु होता है उनके अंदर संभोग करने की इच्छा भी जल्दी पैदा होती है लेकिन यह बात पूरी तरह से सही नहीं है क्योंकि संभोग करने की इच्छा का संबंध शारीरिक विकास की अपेक्षा सामाजिक या अनुवांशिक कारणों से ज्यादा होता है।
कामुक इच्छा होने पर लड़की ये बाते सोचती है-If you want to think of these things-the sensual girl

 अक्सर कुछ लड़कियां मासिकधर्म के दौरान संभोग के प्रति उत्तेजना महसूस करती हैं लेकिन संभोग करने से डरती हैं लेकिन यह बात सही नहीं है। अगर वे इस दौरान संभोग के प्रति उत्तेजना महसूस करती हैं तो उसे संभोग करने से डरना नहीं चाहिए वह अपने पति को संभोग के लिए तैयार कर सकती हैं। इस दौरान स्त्री को गर्भ ठहरने का डर भी नहीं रहता है और उसकी योनि में भी वहुत ज्यादा नमी रहती है। शुरुआत में तो स्त्रियां इस दौरान संभोग करते समय योनि में से ज्यादा खून आने की शिकायत करती हैं लेकिन धीरे-धीरे यह खून आना कम हो जाता है क्योंकि कु्छ समय में गर्भाशय का संकुचन हो जाता है। कुछ स्त्रियों में मासिकधर्म के समय दिमागी तनाव जैसे लक्षण पैदा हो जाते हैं जिसका असर उनकी सेक्स करने की इच्छा पर भी पड़ता है। उनमें चिड़चिड़ापन आ जाता है और इसी के साथ ही जी मिचलाना, कमर में दर्द आदि लक्षण प्रकट होते हैं।


स्त्रियों में सेक्स की प्यास महासागर की अथाह असीम गहराई लिये होता है। सेक्स में स्त्रियां सागर समान होती है। सेक्स क्रिया में मंथन के दौरान सागर इसलिये नहीं थकता की वह कभी अधीर, अशांत, बेचैन और जल्दी में नहीं होता उसमें पर्याप्त धैर्य बना रहता है। स्त्रियां तो राह होती है राह कभी थकती नहीं, राह पर चलने वाले यात्री थक जाते है। क्योंकि उनके चलते रहने की शक्ति सीमित होती है। यही कारण है कि सेक्स में कोई भी पुरुष किसी भी स्त्री को पूरी तरह तृप्त नहीं कर पाता है। स्त्रियां सेक्स में जल्दी से तो कभी संतुष्ट हो ही नहीं सकती। स्त्रियों को सेक्स में संतुष्ट कर पाना किसी भी पुरुष के लिये दु:ससाध्य कार्य होता है। पुरुष जितना उतावना हेाता है स्त्रियां उतनी ही सहज शांत, स्थिर, संतुलित, अनुद्विग्न बनी रहती है।


स्त्रियां सेक्स में हर बार विशिष्ट अनुभव करना पसंद करती हैं। सेक्स के हर अनुभव को जादुई व यादगार बनाना चाहती है। सीधे सेक्स की मुख्य कार्य पर न पहुंचकर पुरुष को चाहिये की पर्याप्त संयम में रहकर समय लें और स्त्रियों को भी सेक्स की मुख्य कार्य के लिये तत्पर होने का अवसर दें। अधिक से अधिक काम कलाओं में वक्त दें। संभोग तक पहुंचने से पहले पुरुष पूरी तरह निश्चितकर लें कि स्त्री पूरी तरह कामोतेजित हो चुकी हो और वह स्वयं भी सम्पूर्णत: उतेजित हो चुका हो। सेक्स में स्लोनेस ही सौन्दर्य है। जल्दबाजी को भी समय की आवश्यकता होती है यह बात सेक्स में ही लागू होती है। योनि मर्दन रुक-रुक कर धीरे धीरे गिन गिनकर लंबे समय तक जारी रखना ही स्त्रियों को क्लाइमेक्स तक पहुंचाता है। पुरुष को संभोग के दौरान अपनी सांसों पर नियंत्रण पाने में कुशलता प्राप्त कर लेता है वह सेक्स का महारथी बन जाता है।
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