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गुरुवार, 27 अक्तूबर 2016

जाने भारत के सम्राट चन्द्र गुप्त मौर्य के बारे में - know. Indian emperor Chandragupta Maurya about -

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चंद्रगुप्त मौर्य के वंशादि के बारे में अधिक ज्ञात नहीं है। हिंदू साहित्य पंरपरा उसके नंदों से संबद्ध, बताती है। जैन परिसिष्टपर्वन् के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य मयूरपोषकों के एक ग्राम के मुखिया की पुत्री से उत्पन्न थे। मध्यकालीन अभिलेखों के साक्ष्यानुसार मौर्य सूर्यवंशी मांधाता से उत्पन्न थे। बौद्ध साहित्य में मौर्य क्षत्रिय कहे गए हैं। महावंश चंद्रगुप्त कोमोरिय (मौर्य) खत्तियों से पैदा हुआ बताता है। दिव्यावदान में बिंदुसार स्वयं की मूर्धाभिषिक्त क्षत्रिय कहते हैं। सम्राट अशोक भी स्वयं को क्षत्रिय बताते हैं। महापरिनिब्बान सुत्त से 5 वी शताब्दी ई 0 पू 0 उत्तर ?? भारत आठ छोटे छोटे गाणराज्यों में बटा था। मोरिय पिप्पलिवन के शासक, गणतांत्रिक व्यवस्थावाली जाति सिद्ध होते हैं। पिप्पलिवन ई.पू. छठी शताब्दी में नेपाल की तराई में स्थित रुम्मिनदेई से लेकर आधुनिक देवरिया जिले के कसया प्रदेश तक को कहते थे। मगध साम्राज्य की प्रसारनीति के कारण इनकी स्वतंत्र स्थिति शीघ्र ही समाप्त हो गई। यहीं कारण था कि चंद्रगुप्त का मयूरपोषकों, चरवाहों तथा लुब्धकों के संपर्क में पालन हुआ। परंपरा के अनुसार वह बचपन में अत्यंत तीक्ष्णबुद्धि था, एवं समवयस्क बालकों का सम्राट् बनकर उनपर शासन करता था। ऐसे ही किसी अवसर पर चाणक्य की दृष्टि उसपर पड़ी, फलत: चंद्रगुप्त तक्षशिला गए जहाँ उन्हें राजोचित शिक्षा दी गई। ग्रीक इतिहासकार जस्टिन के अनुसार सांद्रोकात्तस (चंद्रगुप्त) साधारणजन्मा था।
 जाने भारत के सम्राट चन्द्र गुप्त मौर्य के बारे में - know. Indian emperor Chandragupta Maurya about -

. उनके जीवन के बारे में जो भी जानकारी उपलब्ध है वो सारी जानकारी संस्कृत साहित्य और ग्रीक और लैटिन भाषाओं में से जो चन्द्रगुप्त के ही अँड्रॉटोस और सैंड्रोकोटॉ नाम पर है, में से ली गयी है. बहोत से पारंपरिक भारतीय साहित्यकारों ने मौर्य का सम्बन्ध नंदा राजवंश से भी बताया है जो की आधुनिक भारत में बिहार के नाम से भी जाना जाता है.
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बाद में हज़ारो साल बाद, एक संस्कृत नाटक मुद्राराक्षस में उन्हें “नंदनवय” मतलब नंद के वंशज भी कहा गया था. चन्द्रगुप्त का जन्म उनके पिता के छोड़ चले जाने के बाद एक बदहाल परिवार में हुआ था, कहा जाता है की उनके पिता मौर्य की सरहदों के मुख्य प्रवासी थे. चन्द्रगुप्त की जाती के बारे में यदि बात की जाये तो मुद्राराक्षस में उन्हें कुल-हीन और वृषाला भी कहा गया है. भारतेंदु हरीशचंद्र के अनुवाद के अनुसार उनके पिता नंद के राजा महानंदा और उनकी माता मोरा थी, इसी वजह से उनका उपनाम मौर्य पड़ा. जस्टिन ने यह दावा किया था की चन्द्रगुप्त एक नम्र प्रवृत्ति के शासक थे. वही दूसरी ओर नंद को प्रथित-कुल मतलब प्रसिद्ध और खानदानी कहा गया है. वही बुद्धिस्ट महावंशो ने चन्द्रगुप्त को मोरिया का वंशज (क्षत्रिय) बताया है.

महावंशटिका ने उन्हें बुद्धा के शाक्य वंश से जोड़े रखा, ऐसे वंशज से जिनका सम्बन्ध आदित्य से भी था.
बुद्धिस्ट परम्पराओ में, चन्द्रगुप्त मौर्य क्षत्रिय समुदाय के ही सदस्य थे और उनके बेटे बिन्दुसार और बड़े बेटे प्रचलित बुद्धिस्ट अशोका भी क्षत्रिय वंशज ही माने जाते है. संभवतः हो सकता है की साक्य रेखा से उनका सम्बन्ध स्थापित हुआ हो. (क्षत्रिय की साक्य रेखा को गौतम बुद्धा का वंशज माना जाता है और अशोका मौर्य ने अपने अभिलेख में खुद को बुद्धि साक्य बताया था.) मध्यकालीन अभिलेख में मौर्य का सम्बन्ध क्षत्रिय के सूर्य वंश से बताया गया है.

अपनी जन्मभूमि छोड़कर चली आने वाली मोरिय जाति का मुखिया चंद्रगुप्त के पिता था। दुर्भाग्यवश वह सीमांत पर एक झगड़े में मारे गये और उनका परिवार अनाथ रह गया। उसकी अबला विधवा अपने भाइयों के साथ भागकर पुष्यपुर (कुसुमपुर पाटलिपुत्र) नामक नगर में पहुँची, जहाँ उसने चंद्रगुप्त को जन्म दिया। सुरक्षा के विचार से इस अनाथ बालक को उसके मामाओं ने एक गोशाला में छोड़ दिया, जहाँ एक गड़रिए ने अपने पुत्र की तरह उसका पालन-पोषण किया और जब वह बड़ा हुआ तो उसे एक शिकारी के हाथ बेच दिया, जिसने उसे गाय-भैंस चराने के काम पर लगा दिया। कहा जाता है कि एकसाधारण ग्रामीण बालक चंद्रगुप्त ने राजकीलम नामक एक खेल का आविष्कार करके जन्मजात नेता होने का परिचय दिया। इस खेल में वह राजा बनता था और अपने साथियों को अपना अनुचर बनाता था। वह राजसभा भी आयोजित करता था जिसमें बैठकर वह न्याय करता था। गाँव के बच्चों की एक ऐसी ही राज सभा में चाणक्य ने पहली बार चंद्रगुप्त को देखा था।

बौद्ध रचनाओं में कहा गया है कि ‘नंदिन’ के कुल का कोई पता नहीं चलता (अनात कुल) और चंद्रगुप्त को असंदिग्ध रूप से अभिजात कुल का बताया गया है।
चन्द्रगुप्त मौर्य भारत के ऐसे प्रथम शासक थे, जिन्होंने न केवल यूनानी, बल्कि विदेशी आक्रमणों को पूर्णत: विफल किया तथा भारत के एक बड़े भू-भाग को सिकन्दर जैसे महत्त्वाकांक्षी यूनानी आक्रांता के आधिपत्य से मुक्त कराया. विस्तृत शासन व्यवस्था के होते हुए भी उन्होंने भारत को राजनीतिक एकता प्रदान की. उनकी प्रशासनिक व्यवस्था इतनी सुदृढ़, सुसंगठित थी कि अंग्रेजों ने भी इसे अपना आदर्श माना.

चन्द्रगुप्त मौर्य एक निडर योद्धा थे. उन्हें चन्द्रगुप्त महान के नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने भारत का अधिकतर भाग अपने मौर्य साम्राज्य में शामिल कर लिया था. वे हमेशा से ही भारत में एकता लाना चाहते थे और आर्थिक रूप से भारत का विकास करना चाहते थे. मौर्य कालीन भारत आज भी एक विकसित भारत के रूप में याद किया जाता है.
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