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शुक्रवार, 21 अक्तूबर 2016

गर्भावस्था में खून आता है तो डरे नही -Bleeding in pregnancy is not afraid -

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गर्भावस्था में खून आना या गर्भावस्था में रक्तस्राव होता है तो डरे नही। आमतौर पर, गर्भावस्था के 24 हफ्तों के पहले मानव शरीर में ऐसा होने का वर्णन है। गर्भावस्था के प्रारंभिक दिनों में गर्भस्राव का होना आम समस्या है।प्रारंभिक गर्भस्राव, जो एलएमपी (LMP) (औरत के आखिरी मासिक धर्म) के छठे सप्ताह से पहले होता है, उसे चिकित्सकीय भाषा में गर्भावस्था के प्रारंभिक दौर में नुकसान या रासायनिक गर्भावस्था कहा जाता है। अंतिम मासिक धर्म एलएमपी (LMP) के छठे सप्ताह के बाद होने वाले एलएमपी (LMP) को चिकित्सकीय भाषा में नैदानिक स्वतःप्रवर्तित गर्भपात कहा जाता है।

गर्भावस्था में खून आता है तो डरे नही -Bleeding in pregnancy is not afraid -

गर्भावस्था के पहले 20 सप्ताह के दौरान ब्लीडिंग

गर्भवती महिलाओं में से करीब 20 फीसदी को गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान वैजाइनल ब्लीडिंग हो सकती है। डॉ. मुखर्जी के अनुसार गर्भावस्था की पहली आधी अवधि के दौरान स्पॉटिंग या ब्लीडिंग होने की कई वजहें हो सकती हैं।

इंप्लांटेशन ब्लीडिंग
कुछ महिलाओं को गर्भावस्था की शुरूआत में थोड़ी सामान्य स्पॉटिंग हो सकती है क्योंकि इस दौरान फर्टिलाइज़्ड अंडा गर्भाशय की लाइनिंग पर इंप्लांट होता है। डॉ. मुखर्जी बताती हैं, ’’फर्टिलाइज़्ड अंडा फैलोपियन ट्यूब से होते हुए गर्भाशय में पहुंचता है, जहां यह गर्भाशय की लाइनिंग से जुड़ जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान गर्भाशय में माता की कुछ रक्त धमनियों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे सर्विक्स और योनि से थोड़ा रक्त प्रवाह हो सकता है। चूंकि इंप्लांटेशन ब्लीडिंग गर्भावस्था की बिल्कुल शुरूआत में होती है और इसलिए अक्सर इसे हल्के पीरियड के तौर पर भी देखा जा सकता है।’’

हॉर्मोन स्तर में बदलाव
आमतौर पर मासिक धर्म का नियंत्रण करने वाले हॉर्मोन की वजह से भी गर्भावस्था की शुरूआत में ब्लीडिंग हो सकती है।

सर्वाइकल (गर्भाशयग्रीवा) या योनि में संक्रमण
सर्विक्स, योनि या यौन संक्रमण (जैसे क्लेमीडिया, गोनोरिया या हर्प्स) की वजह से भी गर्भावस्था की पहली तिमाही में ब्लीडिंग हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान होने वाले संक्रमणों का डॉक्टर की सलाह से जल्दी इलाज कराएं।

यौन संबंध
गर्भावस्था के दौरान सर्विक्स में अतिरिक्त रक्त का प्रवाह होता है। गर्भावस्था के दौरान निकलने वाले हॉर्मोन सर्विक्स की सतह में बदलाव कर देते हैं, जिससे घर्षण जैसे यौन संबंध बनाने के बाद इसमें ब्लीडिंग की आशंका बढ़ जाती है।

फाइब्रॉइड्स
कई बार प्लेसेंटा गर्भाशय में ऐसी जगह जुड़ जाता है, जहां उसकी लाइनिंग में फाइब्रॉइड या कोई और विकास हो, इस वजह से भी कई बार ब्लीडिंग हो जाती है। लेकिन इससे गर्भ में पल रहे शिशु को कोई नुकसान नहीं होता है।

कई बार पहले 20 सप्ताह में ब्लीडिंग होना किसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है और आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इसकी वजह निम्नलिखित में से कुछ भी हो सकती है:

गर्भपात
गर्भावस्था के पहले 12 सप्ताह के दौरान गर्भपात होना सबसे सामान्य होता है और पहली तिमाही में ब्लीडिंग होने पर गर्भपात की आशंका सताने लगती है। आमतौर पर गर्भावस्था की शुरूआत में गर्भपात तब होता है, जब भू्रण सही ढंग से विकास नहीं कर रहा हो। डॉ. मुखर्जी कहती हैं,  “कुछ महिलाओं को उनके गर्भवती होने का अहसास होने से पहले ही उनका गर्भपात हो जाता है क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके पीरियड चल रहे हैं।’’

सबकोरियॉनिक हैमोरोज
गर्भावस्था के शुरूआती दौर में ब्लीडिंग होना या प्लेसेंटा के आसपास खून के छोटे-छोटे थक्के जम सकते हैं।

एक्टोपिक गर्भावस्था
एक्टोपिक गर्भावस्था में फर्टिलाइज़्ड भू्रण गर्भाशय के बाहर इंप्लांट हो जाता है आमतौर पर फैलोपियन ट्यूब में। अगर भू्रण वहां विकसित होता रहा तो फैलोपियन ट्यूब फट सकती है, जो माता के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

मोलर गर्भावस्था
मोलर गर्भावस्था एक दुर्लभ स्थिति होती है, जिसमें आसामान्य कोशिकाएं भू्रण के बजाय गर्भाशय में विकसित होने लगती हैं। ऐसा तब होता है, जब भू्रण सही ढंग से विकसित नहीं हो रहा हो लेकिन गर्भाशय की कुछ कोशिकाएं बढ़ने और गुणा होने लगती हैं। दुर्लभ मामलों में कोशिका कैंसरयुक्त हो सकती है और शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकती है।

केमिकल गर्भावस्था
जब अंडा फर्टिलाइज़्ड हो लेकिन पूरी तरह गर्भाशय में इंप्लांट नहीं हुआ हो तो इससे केमिकल गर्भावस्था कहा जाता है। गर्भावस्था के दौरान हॉर्मोन स्तर की जांच से इसका पता लगाया जा सकता है।
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