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शनिवार, 24 सितंबर 2016

सब झूठ था क्या चाँद पर कभी कोई नहीं गया-None had ever been on the moon all lies

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teg-सब झूठ था क्या चाँद पर कभी कोई नहीं गया-None had ever been on the moon all lies-chand ke baare me sach-jhut-चन्द्रमा पर पहला कदम-यूरी गगारिन-चन्द्रमा पर मानव-अंतरिक्ष यात्री के नाम-चाँद पर निबंध-चाँद के बारे में-नील आर्मस्ट्रांग-चंद्रमा के उपाय-चंद्रमा की कलाएं-चद्रमा के बारे में जानकारी-चंद्रमा की कहानी-
अब भी बहुत से लोगो के मन में सवाल आता है की .क्या सचमुच ही चाँद पर इन्सान क्या था या अमेरिका के दूवारा रचा गया फ़िल्मी सीन था .क्यों की आज भी अमेरिका के नासा के पास अपोलो मिशन की जानकारी नही है और चाँद पर बातचीत का टेप भी नही है और भी बहुत सी चीजे है जो शक पैदा करती है , जेसे में आप को कुछ साबुत निचे बता रहा हु उनको देखकर आप खुद फैसला कीजिय -----



चाँद पर बिना वायुमंडल के कैसे उड़ा रहा है ---



सब झूठ था क्या चाँद पर कभी कोई नहीं गया-None had ever been on the moon all lies


भले ही 20 जुलाई, 1969 को नासा का अपोलो-11 चंद्रमा पर उतर गया हो, लेकिन कुछ लोगों ने अमेरिका पर सवाल उठा दिए। उनका कहना था कि यह सारी उपलब्धियां एक फिल्म स्टूडियो में रची गई हैं। उन्होंने मिशन से जुड़ी हुई कई तस्वीरों को ध्यान से देखने पर ऐसा कहा था। उन्होंने कहा कि सूर्य से निकलने वाली रेडिएशन किसी भी इंसान को मार सकती है। फिर नासा इन सभी को सुरक्षित कैसे लेकर आया। चंद्रमा पर दिखाई गई तस्वीरों में अमेरिकी झंडा हवा में उड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। जानकार मानते हैं कि वायुमंडल न होने के कारण चंद्रमा पर ऐसा संभव ही नहीं है। नासा ने इस पर कोई सफाई नहीं दी है।

तस्वीर किस ने ली क्या तीसरा था --


सब झूठ था क्या चाँद पर कभी कोई नहीं गया-None had ever been on the moon all lies

चांद पर कदम रखने वाले दो अंतरिक्ष यात्री दिखाई दे रहे हैं। नील आर्मस्ट्रांग के हेल्मेट के कांच पर दूसरा साथी दिखाई दे रहा है। इसमें यह दिखाई नहीं दे रहा है कि यह तस्वीर किसने और कब ली।
इसके बचाव में नासा कहता है कि यह तस्वीर दूसरे एस्ट्रोनॉट द्वारा ली गई थी। यह कैमरा उसके हेल्मेट पर ही लगा था, जिसने सामने खड़े हुए आर्मस्ट्रांग को कैमरे में उतारा था।

सभी तस्वीरों तारे क्यों नही दिख रहे है --


सब झूठ था क्या चाँद पर कभी कोई नहीं गया-None had ever been on the moon all lies

इसका जवाब ऐसे दिया जाता है कि चंद्रमा की सतह सूर्य की रोशनी से जगमगा रही थी। इससे तारों को तस्वीर में दिखना नामुमकिन था।


परछाइयां अलग अलग या दो या तीन क्यों दिख रही है --

सब झूठ था क्या चाँद पर कभी कोई नहीं गया-None had ever been on the moon all lies

एस्ट्रोनॉट के चंद्रमा पर तस्वीरें खिचाने के दौरान उनकी परछाइयां भी कई रहस्य पैदा करती हैं। लोग इस बात पर तर्क देते हैं कि वहां सभी की परछाई अलग-अलग कोण से और कई आकारों की दिखाई देती है। ऐसा लगता है, जैसे कई दिशाओं से रोशनी पड़ रही हो, जैसा किसी स्टूडियो में फिल्माया जाता है। नासा का कहना है की -हां, वहां रोशनी के कई स्रोत थे। ऐसा सूर्य की रोशनी के कारण था और पृथ्वी से पलट कर आ रही उसकी रोशनी से वहां कई तरह की आकृतियां बन रही थीं

पक्की जमीन पर कदम रखने के निशान केसे बने --

सब झूठ था क्या चाँद पर कभी कोई नहीं गया-None had ever been on the moon all lies


फिर लोग कहते हैं कि एस्ट्रोनॉट के चांद पर कदम रखने के निशान इतने साफ कैसे बने, जबकि वहां न तो वायुमंडल है और न वहां बरसात होती है। ठोस जमीन पर ऐसा होना संभव ही नहीं है।
इस तथ्य को बकवास करार देते हुए नासा ने बताया कि चंद्रमा धूल से भरी हुई जगह है। उसकी सतह पर पाउडर सरीखी धूल भरी पड़ी है। माइक्रोस्कोप से निरीक्षण करने पर पता चलता है कि यह ज्वालामुखी से निर्मित धूल है। इसमें नमी की मात्रा बिल्कुल नहीं थी।

चंद्रमा पर रहस्यमयी रोशनियां क्यों दिख रही है --


सब झूठ था क्या चाँद पर कभी कोई नहीं गया-None had ever been on the moon all lies


इस तस्वीर में रहस्यमयी रोशनियों को देख कर फिल्म स्टूडियो का अहसास होता है। यह एक बात नासा के करोड़ों डॉलर के प्रोजेक्ट पर पानी फेरती हुई दिखाई देती है।
इस के बारे में नासा का कहना है की -तस्वीर में दिखाई दे रही इस तरह की अजीब रोशनी का कारण लेंस फ्लेयर है।

और  आर्मस्ट्रांग ने कहा था, "यह मानव के लिए एक छोटा कदम, लेकिन मानवजाति के लिए लंबी छलांग है।" इसे लेकर भी पिछले साल विवाद छिड़ गया था। नील ने कहा था कि ये शब्द उनके मुंह से अचानक निकले थे। उनके भाई डीन ने कहा है कि इन शब्दों की रिहर्सल नील ने चंद्रमा पर जाने से कई महीने पहले कर ली थी। एेसे में सवाल उठता है कि क्या नील आर्मस्ट्रांग ने झूठ बोला था? क्या मून मिशन की स्क्रिप्ट मिशन पर जाने से पहले ही लिखी जा चुकी थी?

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