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मंगलवार, 27 सितंबर 2016

जानिए महान योद्धा अर्जुन के बारे में रोचक बातें -Learn interesting things about the great warrior Arjuna -

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महाभारत का महान पराक्रमी योधा अर्जुन को तो आप जानते ही होंगे ,जिस के दम पर महाभारत का युद्ध लड़ा गया था क्रष्ण ने अर्जुन को आगे कर के इस युद्ध में पांड्वो को विजय दिलाई थी ,वो अब तक का बहुत बड़ा धनुर्धर था -
महाभारत के नायक अर्जुन का नाम वीरता और पराक्रम का पर्यायवाची बन गया है। अर्जुन जन्म-जात योद्धा थे। उनमें बल, साहस और एकाग्रता का अभूतपूर्व संगम था।-
जानिए महान योद्धा अर्जुन के बारे में रोचक बातें -Learn interesting things about the great warrior Arjuna -
जानिए महान योद्धा अर्जुन के बारे में रोचक बातें -Learn interesting things about the great warrior Arjuna -


  1. अर्जुन कृष्ण के प्रति उतनी ही श्रद्धा रखते थे जितनी हनुमान राम के प्रति। इस संग्रह की पहली कथा, जो दक्षिण भारत में प्रचलित एक लोक कथा पर आधारित है, अर्जुन और हनुमान की भेंट के विषय में है। दोनों को अंत में यह ज्ञात हो जाता है कि कृष्ण और राम एक ही हैं।
  2. अर्जुन को धनुर्विद्या में प्रवीण गुरु द्रोणाचार्य से शिक्षा मिली थी। उन्होंने अनेक देवताओं को प्रसन्न कर बहुतेरे शस्त्रास्र्त्र प्राप्त किये थे, परन्तु उनको अजेय बनाने का श्रेय उनके गाण्डीव धनुष को है। उन्हें गाण्डीव अग्निदेव से मिला था। 
  3. अर्जुन और उनके ममेरे भाई कृष्ण अभिन्न मित्र थे। अर्जुन सदैव कृष्ण से परामर्श करते थे। कुरुक्षेत्र के युद्ध में कृष्ण अर्जुन के सारथी बने थे। 
  4. वैसे द्रौपदी के अलावा अर्जुन की एक अन्य पत्नी का भी ज‌िक्र कई स्थानों पर म‌िलता है। अर्जुन की दूसरी पत्नी सुभद्रा थी। सुभद्रा श्रीकृष्‍ण की बहन और अभ‌िमन्यु की माता थी।
  5. अर्जुन पांडवों में सबसे योग्य और अपने जमाने के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर के साथ ही द‌िखने में भी आकर्षक थे इसल‌िए कई कन्याओं को अर्जुन से प्रेम हुआ। कुछ के साथ एक तरफा प्यार तो कुछ के साथ वैवाह‌िक संबंध भी बने।--


6.महाराज पाण्डु की दो पत्नियाँ थी कुन्ती तथा माद्री। एक दिन वह दोनो पत्नियों के साँथ विहार कर रहा था तभी भूलवश एक मुनि को मृग समझकर उसकी हत्या कर डाला। उस मुनि ने पाण्डु को श्राप दिया कि वह जब भी किसी स्त्री से मिलन करेगा तब उसकी मृत्यु हो जाएगी। उसी श्राप से उनका बालक नहीं था। उन्होने कुन्ती से निवेदन किया तब कुन्ती ने मुनि दुर्वासा के वरदान द्वारा धर्मराज, वायुदेव तथा इंद्र का आवाहन कर तीन पुत्र माँगे। इंद्र द्वारा अर्जुन का जन्म हुआ।


7.द्रोणाचार्य को एेसे योद्धाओं की आवश्यकता थी जो राजा द्रुपद से प्रतिशोध ले सके। इसी कारण वे हस्तिनापुर के 105 राजकुमारों को शिक्षा देने लगे जिसमें से एक अर्जुन भी था। उन्होंने अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बनाने के लिये एकलव्य का अगूठा गुरुदक्षिणा में माँग लिया परंतु अर्जुन ने गुरु का विरोध किया।

8.महर्षि वेदव्यास के कहने पर पाण्डव माता कुन्ती के साथ पांचाल चले गए जहाँ राजा द्रुपद की कन्या द्रौपदी का स्वयंवर रखा गया था। अर्जुन वहाँ ब्राह्मण के भेस में गया और देखा कि महा सभा लगी है, पूरे भारत से राजकुमार आए हैं परंतु कोई भी लक्ष्य भेद नहीं पा रहा था तब अर्जुन ने लक्ष्य भेदन कर द्रौपदी को जीता था। द्रौपदी से इनका पुत्र श्रुतकर्मा हुअा जिसे अश्वत्थामा ने मारा।

9.सुभद्रा भगवान कृष्ण तथा बलराम की बहन थी जिसे कृष्ण के कहने पर अर्जुन द्वारिका से भागा ले गए थे। सुभद्रा से इनका अभिमन्यु नामक पुत्र हुआ जो कुरुक्षेत्र युद्ध में मारा गया।

10.इसके दोनो पुत्र वीरगति को प्राप्त हुए। अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित ने इनका वंश आगे बढ़ाया।

11.अर्जुन तथा पाँचो पाण्डवों को द्युत हारने के बाद वनवास दिया गया तथा एक वर्ष का अज्ञतवास दिया गया जिसके दौरान अप्सरा उर्वशी अर्जुन से मोहित हो गई। अर्जुन ने उर्वशी का निवेदन ठुकरा दिया तब उर्वशी ने अर्जुन को नपुंसकता का श्राप दिया।

12.संस्कृत में 'ल' और 'र' को समान माना गया है इस अनुसार बृहन्नल को बृहन्नर भी कह सकते हैं जिसका संधि विच्छेद बृहद् + नर होगा। अज्ञातवास में वो वेश बदल कर विराट नगर में वास करते थे जहाँ उर्वशी के श्राप के कारण अर्जुन को बृहन्नला बनकर विराट नगर की राजकुमारी उत्तरा को नृत्य सिखाना पड़ा।

13.अर्जुन सबसे अच्छे धनुर्धर और द्रोणाचार्य के प्रमुख शिष्य थे। जीवन में अनेक अवसर पर उन्होने इसका परिचय दिया। इन्होने द्रौपदी को स्वयंवर मे जीता था। कुरूक्षेत्र युद्ध मे ये प्रमुख योद्धा थे। अर्जुन ने ही कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण से अलौकिक प्रश्न किये जो गीता में दर्शाये गए हैं।
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