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बुधवार, 6 दिसंबर 2017

खजुराहो के रहस्यमय मंदिर और नग्न मूर्तियो का राज।The secret of the mysterious temple sculptures of Khajuraho and naked.

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खजुराहो के रहस्यमय मंदिर और उसका इतिहास बहुत प्राचीन है --खजुराहो के रहस्यमय मंदिर और नग्न मूर्तियो का राज।The secret of the mysterious temple sculptures of Khajuraho and naked.
कलाकृति का उत्कृष्ट नमूना होने के बावजूद खजुराहो के मंदिर की मूर्तियों के विषय में बात करना भी अमर्यादित माना जाता है। इसके पीछे कारण है उन मूर्तियों का नग्न होना और संभोग की स्थिति को दर्शाना।
2. आकर्षण आकर्षण
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लेकिन खजुराहो की मूर्तियों की पहचान बस उसकी नग्न मूर्तियों तक ही सीमित नहीं है क्योंकि आज तो फिर भी हम खुद को खुले विचारों वाला मानते हैं और बहुत हद तक समाज में महिला-पुरुष के बीच पनपने वाले आकर्षण को मान्यता भी मिलने लगी है। लेकिन जब इन मूर्तियों का निर्माण हुआ था तब के हालात वर्तमान हालातों से पूरी तरह भिन्न थे।
3. अनसुलझी पहेली
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अनसुलझी पहेली
ये वह दौर था जब सेक्स या इससे संबंधित कोई भी विषय सामाजिक तौर पर पूरी तरह निषेध था। लेकिन इसके बावजूद खजुराहो के मंदिर में नग्न मूर्तियों का निर्माण हुआ। सदियों से यह एक अनसुलझी पहेली ही है कि आखिर खजुराहो की नग्न मूर्तियां कहना क्या चाहती हैं अर्थात इन्हें बनवाने के पीछे उद्देश्य क्या रहा होगा?
4. हिन्दू-जैन धर्म
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हिन्दू-जैन धर्म
हिन्दू और जैन धर्म से प्रेरित खजुराहो के अधिकांश मंदिरों का निर्माण चंदेलों के शासनकाल में हो गया था। लिखित दस्तावेजों के अनुसार 12वीं शताब्दी में खजुराहो में करीब 85 मंदिरों का अस्तित्व मौजूद था लेकिन समय के साथ-साथ ये ध्वस्त होते गए और आज मात्र 20 मंदिर ही शेष रह गए हैं।
5. कला का नमूना
कला का नमूना
खजुराहो के मंदिर कला का एक अद्भुत नमूना हैं जिनमें करीब 10 प्रतिशत कामुक और संभोग की कृतियां दर्शाई गई हैं।
6. तंत्र साधना
तंत्र साधना
भारत में सदियों से तंत्र साधना प्रचलित रही है, अघोरी और तंत्र साधक श्मशान भूमि पर इन साधनाओं के जरिए अलग-अलग सिद्धियां प्राप्त करते रहे हैं। इन तांत्रिक साधनाओं में सेक्स एक अभिन्न रूप के तौर पर अपनाया गया है और खजुराहो की ये मूर्तियां इसी तंत्र साधना के दौरान संभोग की मुद्राओं को दर्शा रही हैं।
7. सेक्स और अध्यात्म
सेक्स और अध्यात्म
इन मूर्तियों के माध्यम से तंत्र द्वारा सेक्स को अध्यात्म से जोड़ने का प्रयास किया गया है और कुछ हद तक वे इनमें सफल भी रहे हैं। खजुराहो की मूर्तियां इस बात का एक बेजोड़ प्रमाण हैं। खजुराहो की मूर्तियों की सबसे खास बात यह है कि नग्न संभोग की प्रतिमाएं होने के बावजूद इनमें कुछ ऐसा नहीं है जिसे देखकर किसी की आंखें झुक जाएं।
8. पवित्रता का अनुभव
पवित्रता का अनुभव
इन्हें देखने पर ऐसा नहीं लगता कि इनमें कुछ भद्दा या अश्लील है। जबकि इसके उलट इन प्रतिमाओं को देखकर मानसिक सुकून और पवित्रता का एहसास होता है।
9. खजुराहो की मूर्तियों का निर्माण
खजुराहो की मूर्तियों का निर्माण
आपको यकीन नहीं होगा लेकिन खजुराहो की इन मूर्तियों का निर्माण भी उन्हीं लोगों ने किया था जिन्होंने आध्यात्मिक सेक्स का अनुभव कर लिया था। सामान्य व्यक्ति की धारणा है कि खजुराहो की मूर्तियों को देखकर व्यक्ति के भीतर वासना का प्रचार होता है।
10. शांत होती है वासना
शांत होती है वासना
लेकिन असल बात ये है कि खजुराहो की ये मूर्तियां अगर कोई लगातार देखता रहे तो उसके मस्तिष्क के सभी विकार स्वत: ही गायब हो जाएंगे। खजुराहो के मंदिरों का निर्माण करवाने वाले लोगों का भी यही ख्याल था कि इन प्रतिमाओं को अगर कोई शांत मन से देखे तो उसका अंतर्मन वासना शून्य हो जाएगा।
11. खजुराहो पर विवाद
खजुराहो पर विवाद
हालांकि कुछ विद्वान इस बात की पैरवी कर चुके हैं कि खजुराहो की ये मूर्तियां अश्लीलता की हद पार कर रही हैं इसलिए इन्हें मिट्टी से पुतवा देना चाहिए।
12. अर्थपूर्ण हैं ये मंदिर
अर्थपूर्ण हैं ये मंदिर
वहीं कुछ विद्वान ये भी कहते हैं कि खजुराहो के मंदिर जैसी प्रतिमाएं देशभर में होंगी तो बाकी किसी भी मंदिर की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि बाकी मंदिरों में न कोई वैज्ञानिकता है, न कोई अर्थ, जबकि खजुराहो के मंदिर जरूर अर्थपूर्ण हैं।
13. कामना और मोक्ष
कामना और मोक्ष
एक गृहस्थ व्यक्ति के जीवन में संपूर्ण तृप्ति के बाद ही मोक्ष की कामना जन्म लेती है। पहले संपूर्ण तृप्ति और उसके बाद मोक्ष, ये दो ही व्यक्ति के जीवन के लक्ष्य हैं।
14. काम से ऊपर उठना
काम से ऊपर उठना
शायद काम को पार कर समाधिलीन होने की इससे बेहतर भौतिक स्थिति की कल्पना दुर्लभ है। खजुराहो के मंदिर के बाहरी द्वार या दीवारों पर उत्कीर्ण इन्द्रीय मूर्तियां जीवन की प्रथम सीढ़ी, काम तृप्ति को पार करने का संकेत कराती हैं और यह बताती हैं कि जिस व्यक्ति ने जीवन के इस प्रथम चरण को पार नहीं किया है, वो देव दर्शन अर्थात मोक्ष के द्वितीय स्तर पर पैर रखने का अधिकारी नहीं है।
15. ईश्वर की प्राप्ति
ईश्वर की प्राप्ति
साधना के आरंभिक चरण में सर्वप्रथम बाधा कामवासना ही बनती है। इन मूर्तियों की अध्यात्मिकता मनुष्य के भीतरतम की इसी कामवासना को बाहर निकाल कर उसे जड़ से चेतन बनाने में है। अपने सार्थक रूप में ये मूर्तियां मनुष्य को हमेशा ईश्वर या मोक्ष की प्राप्ति के लिए काम से ऊपर उठने के लिए प्रेरित करती हैं।

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