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गुरुवार, 4 जनवरी 2018

महिला नागा साधू की रहस्यमय दुनिया ।Naga sadhus mysterious woman in the world.

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महिला या औरत जो नागा साधू बनती है ये कोन होती है ये क्या होती है कैसे बनती है -ये जानकारी हम आपको देने जा रहे है -नागा साधू कैसे होते है आप जानते है लेकिन औरत या स्त्री भी नागा साधू बनती है ये आप नही जानते होंगे -महिला नागा साधू की रहस्यमय दुनिया ।Naga sadhus mysterious woman in the world.in hindi -कुम्भ कुंभ के मेले में बहुत राज रहस्य होते है -इसका कारण भी जाने 
महिला नागा साधू रहस्यमय दुनिया ।Naga sadhus mysterious woman in the world.महिला नागा साधू रहस्यमय दुनिया ।Naga sadhus mysterious woman in the world. महिला नागा सन्यासिन बनाने से पहले अखाड़े के साधु-संत महिला के घर परिवार और पिछले जीवन की जांच-पड़ताल करते है।  4. महिला को भी नागा सन्यासिन बनने से पहले खुद का पिंडदान और तर्पण करना पड़ता है।  5. नागा साधुओं के अखाड़ों में महिला संन्यासियों को एक अलग पहचान और खास महत्व दिया जाता है। ये महिला साधु पुरुष नागाओं की तरह नग्न रहने के बजाए अपने तन पर एक गेरूआ वस्त्र लपेटे रहती हैं। बिना वस्त्रों के शाही स्नान में नहाना प्रतिबंधित होता है, इसलिए यह गेरूआ वस्त्र धारण कर ही स्नान करती हैं। जिस अखाड़े से महिला सन्यास की दीक्षा लेना चाहती है नागा साधु फोटो गैलरी नागा साध्वी महिला साधु नागा साधुओं का रहस्य नागा साधु बनने की प्रक्रिया महिला नागा साधु फोटो नागा बाबा का इतिहास नागा बाबा का वीडियो

         
      1. सन्यासिन बनने से पहले महिला को 6 से 12 साल तक कठिन बृह्मचर्य का पालन करना होता है। इसके बाद गुरु यदि इस बात से संतुष्ट हो जाते है कि महिला बृह्मचर्य का पालन कर सकती है तो उसे दीक्षा देते है।


2 – प्रयाग महाकुंभ में शुरू हुई परंपरा इलाहाबाद(प्रयाग) में संपन्न हुए 2013 महाकुंभ के दौरान महिला नागा सन्यासियों के स्नान और अखाड़े बनाने के लिए अलग से जगह दी गई थी। उस दौरान इसका विरोध भी हुआ था। महाकुंभ में ही पहली बार पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े ने साध्वी वेदगिरी को महामंडलेश्वर की उपाधि दी थी।

3. महिला नागा सन्यासिन बनाने से पहले अखाड़े के साधु-संत महिला के घर परिवार और पिछले जीवन की जांच-पड़ताल करते है।

4. महिला को भी नागा सन्यासिन बनने से पहले खुद का पिंडदान और तर्पण करना पड़ता है।

5. नागा साधुओं के अखाड़ों में महिला संन्यासियों को एक अलग पहचान और खास महत्व दिया जाता है। ये महिला साधु पुरुष नागाओं की तरह नग्न रहने के बजाए अपने तन पर एक गेरूआ वस्त्र लपेटे रहती हैं। बिना वस्त्रों के शाही स्नान में नहाना प्रतिबंधित होता है, इसलिए यह गेरूआ वस्त्र धारण कर ही स्नान करती हैं।

6. जिस अखाड़े से महिला सन्यास की दीक्षा लेना चाहती है, उसके आचार्य महामंडलेष्वर ही उसे दीक्षा देते है।
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