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रविवार, 17 दिसंबर 2017

आरुषि हत्या कांड ,क्या हुवा उस रात,,,Aarushi murder case, what happened that night ,,,

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आरुषि का पूरा सच -आरुषि कौन थी -आरुषि कैसे मरी - एक बहुत ही साधारण सा जीवन जीने वाली एक लड़की जिसकी उसके ही माता – पिता ने बहुत बेरहमी से हत्या कर दी| इस हत्याकांड में अकेली आरुषि नहीं मारी गईथी , उसके साथ उनका नोकर हेमराज भी मारा गया था|

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Aarushi Talwar Hemraj Banjade hatyakand murder case in hindi


आरुषि तलवार हेमराज मर्डर केस हत्याकांड की कहानी
Aarushi Talwar Hemraj hatyakand murder case in hindi

भारत में बहु-प्रसिद्ध और भयावर हत्याकांड में से एक था आरुषि-हेमराज हत्याकांड| यह बहुत बड़ा और ददर्नाक हत्याकांड के रूप में अख़बार, टी.वी चेनलों व इंटरनेट के दवारा आम लोगों के सामने आया है| इस केस (case) के सबंध में सभी महत्वपूर्ण तथ्य आगे प्रस्तुत है-
    पीड़ित व्यक्ति कौन थे?
    हत्या का रहस्य
    वारदात की प्रमुख तथ्य
    निर्णय

पीड़ित व्यक्ति कौन थे?

नोएडा,भारत के सेक्टर नंबर 25 (जलवायु विहार) में रहने वाली महज 14 साल की नाबालिक लड़की, जिसकी बेहरहमी से हत्या कर दी गयी| इसके साथ ही उसी घर में काम कर रहे नौकर हेमराज (45 वर्ष) की भी हत्या कर दी गई| इस तरह से यह दोहरे हत्याकांड के रूप में सामने आया|

आरुषि हत्या का रहस्य (Murder mystery)

15-16 मई,2008 की रात मे एक रहस्यमय हत्याकांड तब हुआ, जब की आरुषि के माता-पिता घर में ही मौजूद थे| आरुषि के पिता ने उसको मारने का आरोप उस घर के नौकर हेमराज पर लगाते हुए, एक एफ.आई.आर (FIR) पुलिस थाने मे दर्ज कराई|

जिसमे सारा शक उस नौकर हेमराज की तरफ था| मीडिया के माध्यम से लोगो के सामने यह खबर तक सामने आयी, इस वारदात में हेमराज के साथ उसके 4 साथी के भी शामिल होने की शंका जताई जा रही थी|

इस वारदात ने मोड़ तब लिया जबकि, हेमराज का शव भी उस बिल्डिंग की छत से बरामत हुआ| लम्बे समय तक बहुत छानबीन चली, जिसके चलते कई अनजाने से रहस्य समय-समय पर सामने आये| कहा जाता है आरुषि की हत्या इतने निर्दयी तरीके से हुई की उसकी आवाज तक किसी को नही आयी|

चर्चित और चलित खबरों के मुताबिक आरुषि के पिता- डॉ.राजेश तलवार और माता- डॉ. नूपुर तलवार को शक था कि, बेटी (आरुषि) और नौकर (हेमराज) के अवैधानिक सम्बन्ध है|

जिसके चलते तलवार दंपति ने आरुषि और हेमराज की गोल्फ-स्टिक, सर्जरी-ब्लेड से हत्या की |

वारदात के प्रमुख तथ्य

    राजेश तलवार ने वारदात और उसकी सचाई जाने बिना, आवेश मे आकर 16 मई 2008 को, आरुषि और हेमराज की हत्या को अनजाम दे दिया|

जिन स्त्रियों में हों ऐसे लक्षण उन्हें शास्त्रों में शुभ नहीं माना गया है-     अगले दिन 17 मई 2008 को हेमराज की death body बिल्डिंग की छत से मिली|

    जाँच के चलते 23 मई 2008 को डॉ. तलवार की गिरफ़्तारी हुई, और डॉ. तलवार मुख्य आरोपी माने गये|

    Case की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई (CBI) ने जाँच शुरू कर FIR दर्ज की|

    सबूतों के ना होने के कारण 12 जुलाई 2008 को घोषित हुए आरोपी को छोड़ दिया गया|

    तलवार दंपति व शक के आधार पर आरोपियों पर मुकदमा चला | कई जाँच और सत्यापन भी हुए|

    लगभग ढाई वर्ष (30 माह) की कार्यवाही के बाद CBI की जाँच में कुछ न मिलने के कारण, CBI ने अपनी खात्मा (क्लोज़र) रिपोर्ट कोर्ट को दी|

    इस दोहरे हत्याकांड में नोएडा पुलिस की लापरवाही, CBI जांच में सबूतों का ना मिलना, फोरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को मिटाने की कोशिश की गयी|

    इस गंभीर अपराध को देखते हुए एक बार पुनः जांच करने की अनुमति ली गयी तथा प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए उच्चतम न्यायालय ने 6 जनवरी 2012 को जांच के पुनः आदेश पारित किये|

    यह मामला गाजियाबाद की नयी सीबीआई जांच समिति विशेष अदालत के द्वारा चला|

    पुनः जांच के दौरान कई ऐसे सबूत व गवाह प्रस्तुत हुए जो कि पूरी तरह से सिद्ध कर रहे थे की अपराध हुआ है|इसके विपरित आरोपी के पास ऐसा कोई सबूत न था जिससे वो सिद्ध कर सके की वह निर्दोष है|

    सभी तथ्यों मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. तलवार दंपति पर

    भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की धारा (Section) 302/34 (समान उद्देश्य से हत्या करना)
    इसके साथ ही IPC की Section 201, (साक्ष्य को छिपाना)
    IPC की Section 203 (फर्जी रिपोर्ट दर्ज करना)

जैसे गंभीर आरोपों की पुष्टि हुई|

    आरोपियों की पुनः गिरफ़्तारी हुई, जांच हुई, गवाहों के बयान हुए सभी सबूतों और गवाहों को देखते हुए अदालत अपने अंतिम निर्णय तक पहुची |

आरुषि हत्याकांड निर्णय (Aarushi hatyakand result)

इतने संगीन अपराध के लिए न्यायालय ने आरुषि के माता-पिता को भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की मुख्य धारा 302 और अन्य धाराओं के तहद उम्र कैद की सजा और जुर्माना लगाया गया|
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