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रविवार, 3 दिसंबर 2017

शीघ्रपतन होता है -पक्का इलाज बता रहा हु -Premature ejaculation is the surest cure I am told -

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शीघ्रपतन होता है -पक्का इलाज बता रहा हु -Premature ejaculation is the surest cure I am told-शीघ्रपतन रोकने के आसान उपायEasy Tips To Prevent Premature Ejaculation,लिंग का ढीलापन, कमजोरी, दुर्बलता, शिथिलता,वीर्य की बढ़ोतरी होती, शरीर में ताकत,संभोग करते समय चरम सुख,बचपन की गलतीइन उपाय आप घर पर करे -सभी तरह की कमजोरी दूर हो जतेगी 

शीघ्रपतन रोकने के आसान उपायEasy Tips To Prevent Premature Ejaculation,लिंग का ढीलापन, कमजोरी, दुर्बलता, शिथिलता,वीर्य की बढ़ोतरी होती, शरीर में ताकत,संभोग करते समय चरम सुख,बचपन की गलती शीघ्र स्खलन के उपाय शीघ्र स्खलन के आयुर्वेदिक उपाय शीघ्र स्खलन का आयुर्वेदिक इलाज शीघ्र स्खलन का इलाज पतंजलि दवा shighrapatan ramdev baba shighrapatan ki medicine शीघ्र स्खलन के आयुर्वेदिक दव हिंदी में जल्दी डिस्चार्ज समस्या आयुर्वेदिक चिकित्सा शीघ्र स्खलन का कारण शीघ्र स्खलन क्या है शीघ्र स्खलन का आयुर्वेदिक उपचार शीघ्र स्खलन की पतंजलि दवा शीघ्र स्खलन कारण व निवारण शीघ्र स्खलन की अंग्रेजी दवा का नाम शीघ्र स्खलन की एलोपैथिक दवा शीघ्र स्खलन का आयुर्वेदिक इलाज स्खलन  स्क्वीज़ तकनीक  erectile dysfunction  जल्दी डिस्चार्ज से दिलाए राहत  शीघ्र स्खलन की होम्योपैथिक दवा  shighrapatan  शीघ्र स्खलन कारण व निवारण  शीघ्र स्खलन की आयुर्वेदिक दवा

* कौंच को कपिकच्छू और कैवांच आदि के नामों से भी जाना जाता है। संभोग करने की शक्ति को बढ़ाने के लिए इसके बीज बहुत लाभकारी रहते हैं। इसके बीजों का सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है, संभोगकरने की इच्छा तेज होती है और शीघ्रपतन रोग में लाभ होता है। इसके बीजों का उपयोग करने के लिए बीजों को दूध या पानी में उबालकर उनके ऊपर का छिलका हटा देना चाहिए।इसके बाद बीजों को सुखाकर बारीक चूर्ण बनालेना चाहिए। इस चूर्ण को लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम मिश्री के साथ दूध में मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन और शीघ्रपतन का रोग दूर होता है।

* शतावरी, गोखरू, तालमखाना, कौंच के बीज, अतिबला और नागबला को एकसाथ मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ रोजाना सेवन करने से स्तंभन शक्ति तेज होती है और शीघ्रपतन के रोग में लाभ होता है। रात को संभोग क्रिया करने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से संभोग क्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होती है। वीर्य का पतला होना, यौन-दुर्बलता और विवाह के बाद शीघ्रपतन होना जैसे रोगों में इसका सेवन बहुत लाभकारी रहता है।

* मोचरस, कौंच के बीज, शतावरी, तालमखाना को 100-100 ग्राम की मात्रा में लेकर लगभग 400 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से बुढ़ापे में भी संभोग क्रिया का पूरा आनंद लिया जा सकता है। इस योग को लगभग2-3 महीने तक सेवन करना लाभकारी रहता है।

* लगभग 6 चम्मच अदरक का रस, 8 चम्मच सफेद प्याज का रस, 2 चम्मच देशी घी और 4 चम्मच शहद को एक साथ मिलाकर किसी साफ कांच के बर्तन में रख लें। इस योग को रोजाना 4 चम्मच की मात्रा में सुबह खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसको लगातार 2 महीने तक सेवन करने से स्नायविक दुर्बलता, शिथिलता, लिंग का ढीलापन, कमजोरी आदि दूर हो जाते हैं।

* बबूल की कच्ची पत्तियां, कच्ची फलियां औरगोंद को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें और इनमें इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर किसी डिब्बे आदि में रखलें। इस चूर्ण को नियमित रूप से 2 महीने तक2-2 चम्मच की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है और स्तंभन शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा यह योगशीघ्रपतन और स्वप्नदोष जैसै रोगों में बहुत लाभकारी रहता है।

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